Wednesday, 4 October 2017

इंतज़ार

Friends the poem was written 9 years ago, hope you will like it :) 
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!! इंतज़ार !!

 !!  अब घड़िया इंतज़ार में कटेंगी
हर लम्हा हर पल तेरे प्यार में कटेंगी
      तेरी यादों को बनाना है पूजा     
    आँसुए आरती का सामान बनेंगी


              पलकों पे छाई उदासी रहेगी
              होठों की मुस्कुराहट भी फरेब होगी
                हर तड़प में तेरी आहट होगी
       आँखे भीगी और साँसे भी जुदा होंगी


हर पल इंतज़ार होगा आँखों में
  उस पल का जिसमें तुझसे बातें होंगी
         तुम मेरे सामने होगी
पर चाहत तुझे देखने की ख़त्म ना होगी


      पल-पल की बेरूख़ी भी हमारी होगी 
वो एहसास, वो लम्हे और वो बातें भी हमारी होगी
      तुम्हारी हर धड़कन पर नाम हमारा होगा
        और तुम्हारी हर धड़कन भी हमारी होगी !!



*                    Ajay Loving…

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